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Application on behalf of Respondent For Suppy of Supporting Documents

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  Application  on behalf of Respondent For Suppy of Supporting Documents  घरेलू हिंसा से लेकर गुजारे भरते के कानूनों के आतंक से लगभग सभी पुरुष व उनके परिवार वाखिफ है। महिलाए बगैर जरुरी दस्तावेज के मुकदमे दर्ज करवा देती है और न्यायधीश बगैर जांच के मुक़दमा दर्ज भी कर लेते है । ये बडा ही दुरभाग्य है कि कोर्ट उच्च न्यायालय के दिशा निर्देश को भी नजर अंदाज कर देते है । अधूरी पिटीशन को भी न्यायलय में चलने दिया जाता है । यही कारण है कि महिलाए धड़ले से कानून से खिलवाड़ करती आई है और बे खोफ करती जा रही है । न्यायलय बगैर तथ्यों को देखे हुए, गुजारा भत्ता बांद देती है और सालों मुकदमें चकते रहते है और गुजारा भत्ता मिलने के बाद महिला जान बूझ कर न्यायलय में आना छोड़ देती है।  ऐसे मामलो मे जहां आपको कोर्ट के रिकॉर्ड में महिला के छुपाए  दस्तावेज को रिकॉर्ड में लाना हो , तो नीचे दी हुई एप्लीकेशन आप कोर्ट में लगा सकते है । कई हद तक इससे गुजारे भरते को भी रोका जा सकता है । हर मुक़दमा अलग होता है , इसलिए इस तरह की एप्लीकशनलगाने से पहले अपने कानूनी सलाहकार से सलाह जरूर लेल...

दिल्ली महिला आयोग की अध्यक्ष श्रीमती स्वाति मालीवाल और झूठे मुकदमों की मार्केटिंग करने का उनका इतिहास

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ये जानना बहुत जरुरी है, किस प्रकार #Feminism नारीवादी सोच हमारी सभ्यता और समाज को एक महामारी से भी ज्यादा नुकसान पहुँचा रही है ।  हमने इससे पहले इस विषय पर प्रकाश डालने की कोशिश करी थी ।  What is #Feminism  ? How they spread Pandemic in the society like #CoronaVirus हिंदुस्तान का संविधान,  जो देश के हर नागरिक के मौलिक अधिकारों को प्रदान करने की वचनबद्धता के लिए जाना जाता है । 31 जनवरी 1992 को महिला आयोग का गठन हुआ था । ये कहना गलत नहीं होगा , संविधान को नजरअंदाज करते हुए व पक्षपात करते हुए। केवल महिला आयोग का गठन किया गया पुरुष आयोग का नहीं । एक तरह से ये कहना गलत नहीं होगा महिला आयोग की बुनियाद ही पक्षपात पर खड़ी हुई । महिला आयोग का गठन महिलाओं के सशक्तिकरण व उनसे जुड़े मुद्दों को उठाने व उसके समाधान के लिए किया गया था । लगभग देश के 29 राज्य व 7 केंद्र शासित प्रदेश है में महिला आयोग स्थापित है । बजट 2020 , वित्त मंत्री श्रीमती निर्मला सीतारमण द्वारा 28,600 करोड़ रूपए, विशिष्ट महिला कार्यक्रम के लिए आवंटन किए गए है । ...

Demand for Impeachment against Justice Chanderchud got viral on social media with hashtag #ImpeachmentAgainstChandrachud

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  जब टवीटर पर आगामी #CJI के खिलाफ़ #ImpeachmentAgainstChandrachud ट्रेंड करने लगा 2 अक्टूबर 2022, जिस दिन को विश्व गांधी जयंती के रुप में मनाता आया है। उस दिन एका एक #ImpeachmentAgainstChandrachud व #Chandrachud  टवीटर पर ट्रेंड करने लगा । हजारों लाखों लोगो ने भारत के आगामी मुख्य न्यायधीश श्री धनञ्जय यशवंत चंद्रचूड़ के खिलाफ़ महाभियोग की मांग को पुरजोर टवीटर पर उठाया । ग़ौरतलब है, आप हार्वर्ड विश्वविद्यालय से एल ० एल ० एम ० की उपाधि व जुडीशियल साइंस में डॉक्टरेट प्राप्त है और 9 नवंबर 2022 से न्यायमूर्ति उदय उमेश ललित के उत्थान के बाद 10 नवंबर 2024 को अपनी सेवानिवृत्ति तक भारत के मुख्य न्यायाधीश बनेंंगे । करोड़ों लोगो की नाराज़गी का कारण था 2018 में सेक्शन 497 के कानून को रद किया जाना । 2018 में जब उच्च न्यायलय के समक्ष पत्नी को दूसरे पुरुष के साथ सम्बन्ध बनाने , के जुर्म में सजा दिलाने के लिए याचिकाकर्ता पति पंहुचा।  न्यायलय ने पत्नी को सजा देने की बजाए धारा 497 को ही खारिज कर दिया। इससे पता चलता है, हिन्दुस्तान की न्यायलय किस प्रकार से महिलाओ को सजा देने से बचत...

#Sextortion वीडियो चैट द्वारा महिलाओं का जबरन वसूली का धंधा

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#Sextortion वीडियो चैट द्वारा महिलाओं का जबरन वसूली का धंधा #CrimeByWomen यह ऐसे शब्द है , जिसे हमारा सरकारी तंत्र जानबूझकर नजरअंदाज करता आया है। यहां तक कि पुलिस या प्रशासन, कोई भी महिलाओं द्वारा किए जा रहे अपराधों के विरुद्ध आवाज नहीं उठाता है या घबराता है। कोई भी अपराध पुरुष द्वारा किया जाता है, तो महिलाओं द्वारा किए गए एक छोटे से टवीट या मैसेज मात्र पर प्रशासन Su-moto एक्शन ले लेता है। वही दूसरी तरफ पुलिस प्रशासन पुरुषों द्वारा किए टवीट,  मैसेज, लिखित शिकायत पर कोई कार्यवाही नहीं करती क्योकि वह शिकायत किसी महिला के खिलाफ होती है। जिसके फल स्वरूप आज    #CrimeByWomen सातवे आसमान पर है।  भारत जैसे देश में महिलाओं द्वारा झुठे बलात्कार छेड़छाड़ के मुकदमों में फसाकर मोटी रकम वसूली करना आम बात है। ऐसे कई मामले अखबारों में छपते रहते है। वहीं अब डिजिटल भारत में आपराधिक महिलाओं ने पुरुषों को निशाना बनाकर, उनसे मोटी रकम वसूलने का एक नया धंधा इज़ात किया है। ऐसे बहुत से मामले सामने आ रहे हैं, जिसमें महिलाएं सोशल मीडिया के माध्यम से पुरुषों से स्व इच्छा संपर्क ...

Regular Bail Application Format

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 Regular Bail Application Format  ज्यादातर मामलों में अनीश कुमार की जजमेंट के बाद से 498A दहेज प्रताड़ना के मुकदमों में गिरफ्तारी होना ना के बराबर हो गया है । पुलिस अपनी कानूनी कार्रवाई पूरी करने के बाद चार्जशीट कोर्ट में पेश करती है। जिसके बाद आरोपियों को जमानत लेनी पड़ती है । यह आवेदन जमानत फॉर्म के साथ लगाई जाती है । इस दौरान कोई बहस या कोई दलीलें नही रखी जाती है । यहा तक कि कई लोग खुद ये प्रक्रिया बगैर वकील के भी खुद पूरी कर लेते है । डरे नही , इस कानूनी अतंकवाद के खिलाफ़ लड़े।

CrPC 239 Discharge Application format for 498A/406 and various sections

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 CrPC 239 Discharge Application format for 498A and various sections  यह बहुत बार सवाल उठा करते है क्या 239 डिस्चार्ज की एप्लीकेशन हमें लगानी चाहिए या नहीं ? मेरे अनुभव से ऐसे बहुत से मुकदमे है, जहां ज्यादातर लोगों को सफलता नहीं मिलती है या मिलती भी हैं तो कुछ सगे संबंधियों के नाम हटा दिए जाते हैं या फिर 406 के आरोपों से मुक्त कर दिया जाता है। मगर कई तारीखों के बाद भी  ट्रायल तब भी झेलना पड़ता है। वहीं दूसरी ओर कई साल इस एप्लीकेशन को निर्णय तक आने में लग जाते हैं , याने कई बहुमूल्य वर्ष खराब हो जाते हैं। जबकि बगैर इसके इतनी अवधि में मुकदमे बहुत आगे तक पहुंच सकते हैं इसलिए हमें ऐसी एप्लीकेशन लगाने से पहले अपने ग्राउंड को अच्छे से अपने सलाहकार से समझ लेना चाहिए या जजमेंट को पढ़ लेना चाहिए कि किस प्रकार लोगो को सफलता मिली । सबसे जरूरत बात और यह एप्लीकेशन में कोई भी नए सबूत बाहर से नहीं लाए जा सकते। केवल और केवल आरोप पत्र तक ही सीमित रहा जा सकता है । जिसके कारण आरोपमुक्त होना कठिन होता है। मेरा यह ब्लॉग सामान्य तरीके से बनाया गया है , इसमें ज्यादातर तरीके के मुकदमों को ध्यान ...